By- Dr. Kailash Dwivedi 'Naturopath'
जल चिकित्सा से पूर्व हमें जल में प्रकारों के विषय में जानना
भी आवश्यक है जल मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है।
मृदु जल : यह वह जल है जिसमें खनिज लवणों की मात्रा या तो नहीं होती या
फिर बहुत कम होती है। ऐसे जल में साबुन धुलने पर खूब झाग उत्पन्न होता है। ऐसा जल स्वास्थ्य
के लिये उत्तम नहीं होता, इसमें,
वर्षा जल, उथले कुओं का जल, बहते नदी या दरिया का जल आदि आते हैं।
अस्थाई कठोर जल : इस प्रकार के जल को यदि उबाल लिया जाये तो इसकी कठोरता दूर
हो जाती है और वह मृदु हो जाता है।
स्थाई कठोर जल : जो जल हम अपने पीने के लिये प्रयोग करते है उसमें साधारण कठोरता
होती है परन्तु जिस जल की कठोरता उस जल को उबालने पर भी दूर नहीं होती, तथा उसकी कठोरता को दूर करने के लिये उसमें
अन्य खनिजों को मिलाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे जल को हम स्थाई रूप से कठोर जल के
नाम से जानते हैं। इस प्रकार के जल में चुना आदि खनिजों के मिल जाने से वह कठोर हो
जाता हैं। यह स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है। इसकी पहचान यह कि इसमें साबुन मिलाने
पर झाग नहीं उठता या कम उठता है।