VRINDAVAN INSTITUTE OF NATUROPATHY AND YOGIC SCIENCES is an authorized Work Integrated Vocational Education Center (WIVE) of Asian International University in India.

खपच्चियों के प्रकारों की व्याख्या करते हुये उनकी उपयोगिता बताइये

By- Dr. Kailash Dwivedi 'Naturopath'


अंगुली की खपच्ची
अंगुली बड़ी हो तो जरूरत के अनुसार 2 इंच तक पट्टी बांधनी चाहिए और इसमें आधा इंच चौड़ा दो बांस या लकड़ी की खपची अंगुली के ऊपर और नीचे देकर और उसके ऊपर रूई लगाकर पट्टी बांधनी चाहिए।
लम्बी हड्डी के लिए खपच्ची
हाथ या पैर की लम्बी हड्डी टूट जाने पर सबसे पहले रोग ग्रस्त भाग को धोकर उसके ऊपर साफ कपड़ा लगाकर फिर रोग ग्रस्त भाग के ऊपर तथा नीचे लकड़ी या बांस की खपची लगाकर उसके ऊपर से रूई लगाकर पट्टी बांधनी चाहिए। पट्टी बांधते समय ध्यान देना चाहिए कि चोट ग्रस्त भाग पर किसी प्रकार से दबाव न पड़े।
टूटकर बाहर निकली हड्डी के लिए खपच्ची
यदि हड्डी टूटकर बाहर निकल पड़े तो टूटे हुए भाग को दोनों ओर से पकड़कर खींचकर इन दोनों टूटे स्थानों को मिला देना चाहिए। हडि्डयों को पकड़ते समय तथा खासकर टूटी हडि्डयों को मिलाते समय ध्यान रखना चाहिए कि उनके बीच में हडि्डयों को मिला देने के बाद लकड़ी की खपची ऊपर नीचे लगाकर उस पर पट्टी बांध दे। इस प्रकार से पट्टी बांधते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी प्रकार से चोट ग्रस्त भाग पर दबाव न पड़े।
मेरुदण्ड के लिए खपच्ची


यदि मेरुदण्ड में चोट लग गए हो और वह टूट जाए तो लकड़ी की खपची मेरुदण्ड पर लगाकर कसकर पट्टी बांध दे।